SEM 3 IMPORTANT QnA 1

 


IMPORTANT - 1



शारीरिक शिक्षा विषय की मिड टर्म परीक्षा (बी.ए. तृतीय सेमेस्टर) के प्रश्न पत्र के सही उत्तर 



इन्हें ध्यान से पढ़ें



खण्ड A (8 अंक)


प्रश्न 1- एनाटॉमी एवं फिजियोलॉजी की परिभाषा लिखिए।  शारीरिक शिक्षा एवं खेलों के लिए उनके अध्ययन का क्या महत्व है।


  उत्तरशरीर रचना-विज्ञान अथवा शारीरिकी (Anatomy)


शरीर रचना विज्ञान (एनाटामी) जीव विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत शरीर के वाह्य व आंतरिक अंग प्रत्यंग की रूप, स्थिति, आकार व संरचना का अध्ययन किया जाता है।


शरीर क्रिया विज्ञान अथवा कार्यिकी (Physiology)


शरीर क्रिया विज्ञान (फिजियोलॉजी) चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत मानव शरीर के विभिन्न अंगों एवं तंत्रों के संचालन एवं कार्य प्रणाली का अध्ययन किया जाता है।

साथ ही व्यायाम तथा खेलकूद की क्रियाओं के दौरान शारीरिक ढांचे एवं शरीर के अंग व तंत्रों में होने वाली आंतरिक क्रियाओ और परिवर्तनों का अध्ययन  स्पोर्ट्स फिजियोलॉजी (Exercise & Sports Physiology) के अंतर्गत किया जाता है। 


शारीरिक शिक्षा एवं खेलों में शरीर रचना विज्ञान एवं शरीर क्रिया विज्ञान के अध्ययन की आवश्यकता एवं महत्व


  • ऐनाटॉमी एवं  फिजियोलॉजी के अध्ययन से शरीर के विभिन्न अंगों के स्थिति आकार एवं  संरचना को समझ सकते हैं जिससे हमें खेलकूद के दौरान विभिन्न शारीरिक अंगों की की स्थिति एवं क्रियाओं को समझते हैं 

  • मानव शरीर के विभिन्न अंगों एवं शरीर की आंतरिक क्रियाओं को समझने में मदद मिलती है

  •  हम विभिन्न आयु की अवस्था में शरीर में हो रहे क्रमिक वृद्धि एवं विकास को समझ सकते हैं

  •  विभिन्न आयु वर्गो हेतु अलग अलग प्रकार की व्यायाम एवं खेलकूद के चयन करने में सहायता मिलती है।

  • खिलाड़ियों को उचित प्रशिक्षण दे सकते हैं 

  • खिलाड़ियों हेतु उचित आहार का निर्धारण कर सकते हैं 

  • खेलकूद क्रियाओं के दौरान लगने वाली चोटों के उपचार में मदद मिलती है 

  • शरीर में होने वाले असामान्य परिवर्तनों को समझने में सहायता मिलती है


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प्रश्न 2- संधियों के प्रकार एवं मानव कंकाल के प्रमुख कार्य लिखिए


उत्तर - कंकाल तंत्र के प्रमुख कार्य


  1. यह शरीर को सहारा देने वाला ढांचा होता है

  2. शरीर को निश्चित आकार प्रदान करता है

  3. शरीर के आंतरिक‌ कोमल अंगों को सुरक्षा प्रदान करता है

  4. शारीरिक अंगों व शरीर की गति हेतु आवश्यक होता है 

  5. अस्थि मज्जा में रुधिर कणिकाओं का निर्माण, 

  6. अस्थियां कैल्शियम जैसे खनिज लवणों का संग्रह व उनका कमी होने पर कैल्शियम मुक्त करती हैं

  7. अस्थियों की क्षतिग्रस्त होने पर का निर्माण व उनकी मरम्मत का कार्य करता है


संधियों के प्रकार - संधियों को उनकी गति के आधार पर तीन भागों में बांटा गया है 


  1. अचल संधि  (Immovable Joints)

  2. अर्द्ध चल संधि (Semi Immovable Joints)

  3. चल संधि (Freely Movable Joints)


1-अचल संधि (Immovable Joints) (स्थिर जोड़) [Fixed, Fibrous, Synarthrosis]


अचल संधि में दो या दो से अधिक अस्थियां आपस में स्थिर रूप से जुड़ी रहती हैं व उनमें कोई भी गति नहीं होती।

उदाहरण: खोपड़ी के जोड़ (Suture), दातों के जोड़ (Gumphosis or Peg & Socket)


2-अर्द्ध चल संधि Slightly Movable Joints


वे जोड़ जिनमें बहुत ही कम अथवा सीमित गति होती है

उदाहरण: रीढ़ की हड्डी के जोड़, कूल्हे का जोड़


3- चल संधि Freely Movable Joints

चल संधि में वे सभी जोड़ आते हैं जो एक या एक से अधिक तलों (Planes) पर गतियां करते हैं। चल संधि के कारण ही शरीर के विभिन्न अंग गतियां करते हैं

उदाहरण - कंधे, घुटने एवं कलाई के जोड़़ आदि


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प्रश्न 3 - बनावट एवं गतिशीलता के आधार पर चल संधियां कितने प्रकार की होती हैं? वर्णन कीजिए


चल संधियों को बनावट, स्थिति एवं गतिशीलता के आधार पर इन्हें छह भागों में बांटा गया है


1- फिसलने वाले जोड़ (ग्लाइडिंग ज्वाइंट, Gliding Joints)


इसमें संधि करने वाली अस्थियां एक दूसरे के ऊपर थोड़ा सा फिसलती है जैसे कार्पल और टार्सल के जोड़


2- पीवट जोड़ Pivot Joint - इस संधि में एक हड्डी का सिरा दूसरी स्थिर हड्डी की सिरे पर घूमता (घूर्णन) है। जैसे सर्वाइकल (C1, C2) के ऊपर खोपड़ी घूमती है


3- कब्जा संधि Hinge Joint- कब्जा संधि में जुड़ने वाली अस्थियों के बीच किसी दरवाजे के कब्जे की तरह ही केवल एक ही तल (Plane) में गति संभव होती है जैसे घुटने और उंगलियों के जोड़


4- बाल व साकेट जोड़ Ball & Socket Joint- इस जोड़ में एक हड्डी का गेंद के आकार (Ball) का एक सिरा दूसरी अस्थि के गड्ढे नुमा आकृति (Socket) में फिट बैठ कर जोड़ की सभी तलों पर गतियां संभव करता है। जैसे कंधे और कूल्हे का जोड़ 


5- काठी जोड़ Saddle Joint- यह दो अस्थियों के उत्तल और अवतल सिरों के बीच बनने वाला जोड़ है, जिस प्रकार एक घुड़सवार घोड़े के ऊपर बैठा हो। जैसे अंगूठे कार्पल्स का जोड़


6- कंडोलोइड जोड़ Condyloid Joint- इस प्रकार की जोड़ में दो तलों में गतिया संभव होती है जैसे कलाई की गति जो सामने और पीछे की ओर तथा दाईं और बाईं तरफ होती है


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प्रश्न 4 - कार्डिएक आउटपुट, स्ट्रोक वॉल्यूम, वाइटल कैपेसिटी, टाइडल वॉल्यूम की परिभाषा लिखिए 

उत्तर 

स्ट्रोक वॉल्यूम - हृदय के धड़कने पर प्रत्येक संकुचन के दौरान हृदय के बाएं निलय (वेंट्रिकल) से पंप किए गए रक्त की मात्रा को स्ट्रोक वॉल्यूम कहते हैं। एक स्वस्थ मनुष्य का स्ट्रोक वॉल्यूम 70ml होता है अर्थात वह एक धड़कन में 70 मिलीलीटर रक्त धमनी में पंप करता है


कार्डिएक आउटपुट - हृदय द्वारा प्रति मिनट शरीर में पंप की जाने वाली रक्त की मात्रा को कार्डिएक आउटपुट कहते हैं। एक स्वस्थ मनुष्य का कार्डियक आउटपुट लगभग 5 लीटर प्रति मिनट होता है अर्थात उसका ह्रदय  1 मिनट में 5 लीटर रक्त शरीर में पंप करता है


वाइटल कैपेसिटी - एक बार अधिकतम सांस अंदर लेने के बाद जो अधिकतम सांस बाहर छोड़ी जाती है वह वायु की मात्रा वाइटल कैपेसिटी कहलाती है। एक स्वस्थ मनुष्य की वाइटल केपेसिटी लगभग 4800ml होती है।


टाइडल वॉल्यूम - टाइडल वॉल्यूम वायु कि वह मात्रा होती है जो प्रत्येक बार सांस लेने की क्रिया में अंदर ली जाती है तथा बाहर छोड़ी जाती है। एक सामान्य स्वस्थ मनुष्य का टाइडल वॉल्यूम लगभग 500ml होता है।


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प्रश्न 4- नियमित व्यायाम करने से परिसंचरण तंत्र पर होने वाले चार प्रभाव लिखिए 

उत्तर 

  • स्ट्रोक वॉल्यूम, टाइडल वॉल्यूम, वाइटल कैपेसिटी और कार्डिएक आउटपुट में वृद्धि

  • हृदय की मांसपेशियां मजबूत बनती है

  • हृदय के आकार में वृद्धि

  • रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा में कमी आती है 

  • रक्तचाप में कमी आती है 

  • थकान सहने की क्षमता (इंड्योरेंस) बढ़ जाता है




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खण्ड B (6 अंक)

1- ऊतक कितने प्रकार के होते हैं, उनके बारे में लिखिए


ऊतक के प्रकार- 4 प्रकार के होते हैं 

1- उपकला अथवा एपिथीलियम ऊतक,  

2- संयोजी उत्तक 

3- पेशीय ऊतक 

4- तंत्रिका ऊतक


1-उपकला (Epithelial Tissue)


यह जन्तुओं के शरीर में पाया जाने वाला सबसे सामान्य ऊतक है, यह लगभग सभी अंगों के ऊपर एक पर्त के रूप में उपस्थित होता है। तथा समस्त खोखले अंगों को भीतर से भी ढँकता है। रुधिरवाहिनियों के भीतर ऐसा ही ऊतक, जिसे अंत:स्तर कहते हैं, रहता है। उपकला का मुख्य कार्य रक्षण, शोषण एवं स्राव का है।


इस ऊतक की कोशिकाएँ एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं, और अनवरत सतह का निर्माण करती हैं जिसके कारण इन्हें पेवमेन्ट ऊतक भी कहा जाता है। इन ऊतकों में अंतर्कोशिकीय अवकाश बहुत कम होता है।


2- संयोजी ऊतक (Connective tissue)


जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इन ऊतकों का मुख्य कार्य शरीर के विभिन्न अंगों एवं ऊतकों को एक-दूसरे से जोड़ना होता हैं। यह प्रत्येक अंग में पाया जाता है। इसके अंतर्गत एमबीएन एनडीए निम्नलिखित ऊतक आते हैं

  1. रक्त (Blood)

  2. अस्थियाँ (Bones)

  3. उपास्थियाँ (Cartilage)

  4. कन्डरा (Tendon टेण्डन)

  5. अस्थिबंध (Ligament लिगामेण्ट)

  6.  वसा ऊतक (Adipose Tissue)

  7. अंतरालीय ऊतक (एरिओलर)


रुधिर ऊतक

मनुष्य के शरीर में करीब 5 लीटर रक्त होता है। रक्त 3 प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है, जो कि प्लाज्मा में बिखरे होते हैं। ये तीन प्रकार की कोशिकाएँ हैं, 

1.लाल रक्त कणिकाएँ, RBC 

2.श्वेत रक्त कणिकाएँ WBC 

3.प्लेटलेट्स Platelets 


लाल रक्त कणिका (RBC) श्वसन अंगों से आक्सीजन ले कर सारे शरीर में पहुंचाने का और कार्बन डाईआक्साईड को शरीर से श्वसन अंगों तक ले जाने का काम करता है। इनकी कमी से रक्ताल्पता (अनिमिया) का रोग हो जाता है।मानव की लाल रुधिरकोशिका में न्यूक्लियस नहीं रहता है।

लाल रक्त कणिका की आयु कुछ दिनों से लेकर 120 दिनों तक की होती है। इसके बाद इसकी कोशिकाएं प्लीहा में अपघटित हो जाती हैं। परन्तु इसके साथ-साथ अस्थि मज्जा (बोन मैरो) में इसका उत्पादन भी होता रहता है। यह बनने और टूटने की क्रिया एक निश्चित अनुपात में होती रहती है, जिससे शरीर में खून की कमी नहीं हो पाती।

ऊतकों को आक्सीजन पहुँचाना।


श्वैत रक्त कणिका (WBC) हानीकारक तत्वों तथा बिमारी पैदा करने वाले जिवाणुओं से शरीर की रक्षा करते हैं। इन्हीं लिंफोसाइट्स (Lymphocytes) भी कहते हैं. शरीर पर किसी बैक्टीरिया का हमला होने पर यह सबसे पहले सक्रिय होते हैं 

शरीर में WBC की कमी से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है तथा शरीर आसानी से बीमारियों का शिकार हो जाता है


प्लेटलेट्स वो ब्लड सेल्स होते हैं जो शरीर से रक्त बहने की अवस्था में थक्के बना कर खून को बहने को रोकते हैं. प्लेटलेट्स अस्थिमज्जा (बोन मैरो) में बनते हैं. बोन मैरो में स्टेम सेल्स होते हैं जो रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स के तौर पर विकसित होते हैं. शरीर में प्लेटलेट्स कम होने की वजह  से थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (Thrombocytopenia) नामक बीमारी का शिकार हो जाते हैं. प्लेटलेट्स रक्त वाहिनियों की सुरक्षा में भू सहायक होते हैं।



रक्त के कार्य 

  1. शरीर की समस्त कोशिकाओं को ऑक्सीजन पहुंचाना तथा वहां से कार्बन डाइऑक्साइड को वापस फेफड़ों तक खिलाना

  2. पोषक तत्वों जैसे ग्लूकोस, अमीनो अम्ल और वसा अम्ल का परिवहन

  3. उत्सर्जी पदार्थों को बाहर करना जैसे- यूरिया कार्बन, डाई आक्साइड, लैक्टिक अम्ल आदि।

  4. प्रतिरक्षात्मक कार्य

  5. संदेशवाहक का कार्य करना, इसके अन्तर्गत हार्मोन्स आदि के संदेश देना।

  6. शरीर पी.एच. नियंत्रित करना

  7. शरीर का तापमान नियंत्रित करना


अस्थि ऊतक

यह कड़े और मजबूत ऊतक होते हैं। इनका निर्माण विभिन्न प्रकार के खनिज चूना एवं फ़ॉस्फ़ोरस से होता है। बड़ी अस्थियों की अस्थि मज्जा के अंदर लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण होता है।


उपास्थियाँ (Cartilage - कार्टिलेज )

उपास्थि अस्थियों के मुकाबले कुछ अपेक्षा कुछ कम कड़े लेकिन लचीले वे  रेशेदार और मजबूत ऊतक होते हैं। उपास्थि प्रायः बड़े जोड़ों पर मिलने वाली हड्डियों के सिरों पर कवरिंग एवं उसकी कुशनिंग बनाती है जिससे हड्डियों आपस में ना घिसें। उपास्थि शरीर के अन्य ऊतकों को आकार, सहारा और संरचना प्रदान करता है। कार्टिलेज जोड़ों में हड्डी की सतहों को भी चिकना करता है। यह लंबी हड्डियों के विकास और वृद्धि के लिए आवश्यक है।


कन्डरा (Tendon टेण्डन)

कण्डरा मांसपेशियों को हड्डी से जोड़ने वाला रेशेदार ऊतक का कठोर लेकिन लचीले मोटा पट्टा (बैंड) होते  हैं। टेंडन कोलेजन फाइबर से बने होते हैं। यह मांसपेशियों के संकुचन से उत्पन्न बल को हड्डी तक पहुंचाने का कार्य करता है। टेंडन मजबूत और टिकाऊ और लचीले होते हैं जिससे वे बिना टूटे या फटे रह सकते हैं। टेंडन की विस्तारशीलता का मतलब है कि वे मांसपेशियों के संकुचन से उत्पन्न बल को अवशोषित करते हैं और साथ ही चलने और मांसपेशियों की अन्य गतियों के दौरान ऊर्जा खपत को कम करते हैं।


अस्थिबंधन (Ligament लिगामेंट) 

लिगामेंट हड्डी को हड्डी जोड़ने वाला संयोजी उत्तक है जो कि जोड़ों को स्थिर रखता है यह जोड़ों में गति होने देने के लिए पर्याप्त लचीला होता है।


वसा ऊतक (Adipose Tissue)

वसा ऊतक या वसा एक ढीला संयोजी ऊतक है जो ज्यादातर एडिपोसाइट्स से बना होता है। इसकी मुख्य भूमिका वसा के रूप में ऊर्जा को संग्रहित करना है। यह शरीर के लिए कुशन का कार्य करता है तथा शरीर का तापमान बनाए रखता है। इसे एक प्रमुख अंतःस्रावी अंग भी माना जाता है। इसकी अधिकता होने पर व्यक्ति मोटापे का शिकार हो जाता है।


अंतरालीय ऊतक (एरिओलर)

एरिओलर संयोजी ऊतक एक प्रकार का संयोजी ऊतक है जो पूरे मानव शरीर में मौजूद होता है। एरोलर ऊतक शरीर में व्यापक रूप से वितरित होते हैं और मुख्य रूप से अन्य ऊतकों के बीच पैकिंग सामग्री के रूप में कार्य करते हैं तथा ऊतकों के बीच घर्षण को रोकता है तथा अंगों, मांसपेशियों और कई अन्य ऊतकों की रक्षा करने में मदद करता है। यह त्वचा को एक साथ बांधने में भी मदद करता है। तथा एक सुरक्षात्मक ढांचा प्रदान करता है जो प्रमुख संरचनाओं को जगह में रखता है



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2- आंतरिक श्वसन एवं वाह्य श्वसन के बारे में लिखिए


समस्त जीवधारी जीवित रहने के लिए सांस लेते हैं अथवा श्वसन करते हैं. 

सामान्य शब्दों में जीव जंतुओं द्वारा वातावरण से ऑक्सीजन ग्रहण कर डाई ऑक्साइड को वातावरण में छोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान, कोशिकाओं में ऑक्सीजन की उपस्थिति में भोजन के ऑक्सीकरण होने की क्रिया को श्वसन कहते हैं। 

श्वसन दो प्रकार का होता है


1.बाहरी श्वसन(External Respiration)


बाहरी अथवा वाह्य श्वसन फेफड़ों में सांस में ली गई वायु में उपस्थित ऑक्सीजन (O2) और रक्त में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के बीच आदान प्रदान की प्रक्रिया है।

अर्थात इसमें वातावरण की O2 रक्त द्वारा ग्रहण कर ली जाती है तथा रक्त में उपस्थित CO2 को सांस द्वारा शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।


क्योंकि यह श्वसन क्रिया फेफड़ों (फुफ्फुसों- Lungs) में सम्पन्न होती है। इसलिए इसे फुफ्फुस श्वसन (Pulmonary respiration) भी कहा जाता है। 


2. आन्तरिक श्वसन (Internal Respiration)


रक्त वाहिकाओं द्वारा ऑक्सीजन युक्त रक्त प्रत्येक कोशिका तक पहुंचता है जहां पर रक्त में उपस्थित O2 कोशिकाओं द्वारा अवशोषित कर ली जाती है जिससे कोशिका में ऑक्सीकरण की प्रक्रिया होती है। इसके फलस्वरूप कोशिका में ऊर्जा एवं CO2 मुक्त होती है। मुक्त हुई CO2 वापस रख दी आ जाती है। 

कोशिकीय स्तर पर O2 एवं CO2 की इसी आदान प्रदान को आंतरिक अथवा कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration) कहा जाता है।  


आंतरिक श्वसन में कोशिकाओं में ईंधन पदार्थों (ग्लूकोस) के ऑक्सीकरण से ऊर्जा का उत्पादन होता है जिससे हमारे शरीर के समस्त आंतरिक तंत्र तथा बाहरी अंग कार्य करने के लिए ऊर्जा प्राप्त करते हैं


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3- पाचन तंत्र के कार्य लिखिए  

पाचन के 


1 - अंतर्ग्रहण या भोजन को खाना (Ingestion): मनुष्यों में भोजन मुंह के माध्यम से खाया जाता है और इसे हाथों की मदद से मुंह में डालते हैं |

2. पाचन (Digestion): भोजन का पाचन मुंह से ही शुरु हो जाता है| पाचन की प्रक्रिया इस प्रकार होती हैः मुंह गुहा या मुख गुहिका (buccal cavity) में दांत, जीभ और लार ग्रंथियां होती हैं| दांत भोजन को छोटे– छोटे टुकड़ों में काटता है, उसे चबाता और पीसता है| इसलिए, दांत भौतिक पाचन में मदद करते हैं| हमारे मुंह में पाई जाने वाली लार ग्रंथियां लार बनाती हैं और जीभ की मदद से लार भोजन में मिलता है| मुँह के बाद भोजन आहार नाल के द्वार पेट में पहुँचता है 

पेट अंग्रेजी वर्णमाला के J अक्षर के आकार वाला अंग होता है जो पेट की बाईं तरफ होता है| भोजन पेट में करीब तीन घंटों तक पीसा जाता है| इस दौरान, भोजन और भी छोटे टुकड़ों में टूटता है और एक अर्ध–ठोस पेस्ट बनता है| पेट की दीवारों में उपस्थित ग्रंथियां अमाशय रस (gastric juice) का स्राव करती हैं और इसमें तीन पदार्थ होते हैं: हाइड्रोक्लोरिक एसिड, पेपसीन एंजाइम और म्युकस| हाइड्रोक्लोरिक एसिड की उपस्थिति के कारण भोजन अम्लीय प्रकृति का होता है और पेप्सीन एंजाइम बहुत छोटे कणों को बनाने के लिए भोजन में मौजूद प्रोटीन का पाचन शुरु कर देता है| इसलिए, प्रोटीन का पाचन पेट में शुरु होता है|

3. अवशोष (Absorption): पाचन के बाद भोजन के कण छोटे हो जाते हैं और छोटी आंत से होते हुए हमारे रक्त में पहुंचते हैं| इसलिए, हम कह सकते हैं कि छोटी आंत पचाये हुए भोजन के अवशोषण का मुख्य क्षेत्र है| छोटी आंत की भीतरी सतह में लाखों, उंगलियों जैसे प्रक्षेपण होते हैं जिन्हें विली कहा जाता है| ये अवशोषण के लिए बड़ा सतह क्षेत्र प्रदान करते हैं और पचा हुआ भोजन हमारे रक्त में जाता है|

4. समावेश (Assimilation):  रक्त पचाए हुए और घुले हुए भोजन को शरीर के सभी अंगों तक ले जाता है जहां यह कोशिका के रूप में समावेशित होता है| शरीर की कोशिकाएं समावेशित भोजन का प्रयोग ऊर्जा प्राप्त करने के साथ– साथ शरीर के विकास और मरम्मत के लिए भी करती हैं| अपचा भोजन यकृत में कार्बोहाइड्रेट के रूप में जमा होता है जिसे ग्लाइकोजेन कहते हैं और जरूरत पड़ने पर शरीर इसका उपयोग कर सकता है|

5. मल–त्याग (Egestion): हमारे द्वारा खाए गए भोजन का वह हिस्सा जिसे हमारा शरीर नहीं पचा सकता. यह अनपचा भोजन छोटी आंत में अवशोषित नहीं हो सकता. इसलिए, अनपचा भोजन छोटी आंत से बड़ी आंत में जाता है| बड़ी आंत की दीवारें इस भोजन में से ज्यादातर पानी को सोख लेती हैं और उसे ठोस बना देती हैं| बड़ी आंत का अंतिम अंग जिसे रेक्टम कहते हैं, इस अनपचे भोजन को कुछ समय के लिए भंडार कर रखता है और अंत में गुदा द्वारा यह हमारे शरीर से मल के रूप में बाहर निकल जाता है. इस प्रक्रिया को मल– त्याग कहते हैं|


खण्ड C (4 अंक)

1-कौन से कोशिकांग को कोशिका का पावर हाउस कहा जाता है

a.लाइसोसोम


2- कौन सा संयोजी उत्तक जोड़ों की अस्थियों को स्थिर रखता है

c. लिगामेंट                                


3-हृदय द्वारा एक धड़कन में पंप की जाने वाली रक्त की मात्रा को क्या कहते हैं?

a. स्ट्रोक वॉल्यूम             


4- शरीर की सबसे लंबी हड्डी कौन सी होती है

                 b. फीमर 

                



खण्ड D  (2 अंक)- सत्य एवं असत्य कथन का चयन कीजिए

1- लाइसोसोम को आत्महत्या की थैली भी कहा जाता है-        सत्य/असत्य

2- कब्जा संधि में सबसे अधिक सीमा में गति संभव होती है-     सत्य/असत्य

3- पलमोनरी धमनी में शुद्ध रक्त बहता है -                           सत्य/असत्य

4- पल्मोनरी शिरा में शुद्ध रक्त बहता है-                               सत्य/असत्य





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