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Showing posts from December, 2020

कंकाल तंत्र, जोड़ व उनकी गतियां

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  कंकाल तंत्र Skeletal System कंकाल तंत्र मानव शरीर को आकार व सहारा देने तथा आंतरिक अंगों को सुरक्षा प्रदान करने हेतु अनेक अस्थियों के संयोजन से निर्मित आंतरिक संरचना है। इसके अतिरिक्त यह अस्थियों व पेशियों के संयोजन के लिए आधार प्रदान करने के साथ यह शारीरिक अंगों को गति प्रदान करने में सहायक होता है। अस्थियों से निर्मित ढांचे को कंकाल अथवा अस्थिपिंजर भी कहा जाता है। एक सामान्य वयस्क मानव अस्थिपिंजर में 206 अस्थियां होती हैं। शिशु के जन्म के समय शरीर में अस्थियों की संख्या लगभग 306 होती है जिनकी संख्या आयु बढ़ने पर परिपक्वता की अवस्था आने पर म 206 रह जाती हैं। मानव कंकाल तंत्र के मुख्य कार्य यह शरीर को सहारा देने वाला ढांचा होता है शरीर के आंतरिक‌ कोमल अंगों को सुरक्षा प्रदान करता है शारीरिक अंगों व शरीर की गति हेतु आवश्यक  अस्थि मज्जा में रुधिर कणिकाओं का निर्माण,  अस्थियां कैल्शियम जैसे खनिज लवणों का संग्रह व उनका कमी होने पर कैल्शियम मुक्त करती हैं अस्थियों की क्षतिग्रस्त होने पर का निर्माण व उनकी मरम्मत का कार्य करता है अस्थियों के प्रकार  लंबी अस्थियां Long Bo...

ऊतक

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 ऊतक (tissue)  समान आकार-प्रकार की कोशिकाओं का समूह ऊतक (Tissue) कहलाता है, जो मिलकर किसी विशेष कार्य को संपन्न करता है।  अलग-अलग प्रकार के कार्य करने वाले ऊतकों की संरचना भी अलग-अलग होती है एककोशिकीय जीवों, एवं कुछ निम्न वर्गों के जीवों के अलावा संपूर्ण जीव-जगत में कोशिकाएँ आपस में संयोजित होकर ऊतकों का निर्माण करती है, जो किसी विशेष प्रकार के कार्य को संपादित करती हैं। ऊतकों को बनाने वाली कोशिकाओं की संरचना, प्रकार एवं उतकों द्वारा संपन्न होने वाले विभिन्न कार्यों के आधार पर विभिन्न प्रकार के ऊतकों की संरचना भिन्न-भिन्न होती है।  कुछ कोशिकाओं के बीच अंर्तकोशिकीय अवकाश पाया जाता है, कुछ में नहीं, और कुछ में पाया जाता है, लेकिन बहुत कम। ये अंतर्कोशीकीय अवकाश एवं इनमें भरा हुआ अंर्तकोशिकीय द्रव्य भी ऊतकों के प्रकार का निर्धारण करता है। ऊतक के अध्ययन को ऊतक विज्ञान (Histology) के रूप में जाना जाता है। जन्तु ऊतक मुख्यत:पांच प्रकार के होते हैं: उपकला या एपिथीलियल ऊतक (epithelial tissue) संयोजी ऊतक (connective tissues) पेशी ऊतक (muscular tissues) तंत्रिका ऊतक (nervous tis...

कोशिका की संरचना

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  कोशिका (Cell) कोशिका (Cell) सजीवों के शरीर की सबसे छोटी रचनात्मक, जीवात्मक और क्रियात्मक इकाई है। कोशिका विभिन्न पदार्थों का वह छोटे-से-छोटा संगठित रूप है जिसमें वे सभी क्रियाएँ होती हैं जिन्हें सामूहिक रूप से हम जीवन कहतें हैं। कोशिकाएँ सजीव होती हैं तथा वे सभी कार्य करती हैं, जिन्हें सजीव प्राणी करते हैं।  सजीवों की सभी जैविक क्रियाएँ कोशिकाओं के भीतर होती हैं। जीवन के लिए आवश्यक प्रोटीन, लिपिड, हार्मोन और एंजाइम का उत्पादन भी कोशिकाओं द्वारा ही किया जाता है। कोशिकाओं के भीतर ही आवश्यक आनुवांशिक सूचनाएँ होती हैं जिनसे कोशिका के कार्यों का नियंत्रण होता है तथा सूचनाएँ अगली पीढ़ी की कोशिकाओं में स्थानान्तरित होती हैं कोशिका की खोज रॉबर्ट हुक ने 1665 ई० में किया। कोशिकाओं का विधिवत अध्ययन कोशिका विज्ञान (Cytology) या 'कोशिका जैविकी' (Cell Biology) कहलाता है। कोशिका के जीवित होने का लक्षण यही है कि उसमें सजीवों के लक्षण अभिक्रिया, शक्ति, वृद्धि, उत्सर्जन, जनन, आयु एवं मृत्यु जैसी समस्त क्रियाएं होती हैं। शरीर का स्वास्थ्य कोशिकाओं के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। कार्यनुसार कोश...

एनाटामी व फिजियोलॉजी - शरीर रचना विज्ञान एवं क्रिया विज्ञान

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शरीर रचना विज्ञान एवं शरीर क्रिया विज्ञान Anatomy and Physiology (एनाटॉमी एवं फिजियोलॉजी) मानव शरीर एक अद्भुत जटिल मशीन है जो कि निरंतर कई कार्य एवं क्रियाएंं जीवन पर्यंत  बाह्य एवं आंतरिक रूप से अद्भुत समन्वय के साथ संपादित करती रहती है।  देखना, सुनना, सांस लेना, चलना फिरना, भोजन का पाचन,सोचना आदि प्रकार की अनंत क्रियाएं हैं जो कि हम जाने अनजाने में जीवन पर्यंत करते रहते हैं। समस्त कार्य शरीर के विभिन्न अंग अत्यधिक संतुलन एवं संयोजन के साथ करते हैं। शरीर की संपूर्ण कार्य प्रणाली को समझने के लिए शरीर की संरचना एवं शरीर की कार्यप्रणाली को समझना आवश्यक हो जाता है   शरीर रचना-विज्ञान अथवा शारीरिकी (Anatomy) शरीर रचना विज्ञान जीव विज्ञान और आयुर्विज्ञान की एक शाखा है जिसके अंतर्गत किसी जीवित (चल या अचल) वस्तु के शरीर के वाह्य व आंतरिक अंग प्रत्यंग की रूप, स्थिति, आकार व रचना का अध्ययन किया जाता है। शरीर क्रिया विज्ञान अथवा कार्यिकी (Physiology) शरीर क्रिया विज्ञान आयुर्विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत मानव शरीर के विभिन्न अंगों एवं तंत्रों के संचालन एवं कार्य प्रणाली का अध...

BA ii Syllabus 2nd Paper

  PHYSICAL EDUCATION  B.A-II YEAR   PAPER SECOND  MAXIMUM MARKS-30 Health Education UNIT-I Health and Health Education # Meaning, definition and dimensions of health. स्वास्थ्य का अर्थ एवं स्वास्थ्य के आयाम # Meaning, definition, objectives, principles and importance of Health Education. # Nutrition, Balance diet, its elements and sources, factors affecting Balance diet, Importance of Balance diet. # Nutritional intake for the athletes before and after training session or competition. UNIT-II Drugs and Tobacco Effects of Drugs and tobacco on an individual and its effects on sports performance. Doping in sports. UNIT-III First Aid # Meaning, definition and importance of first aid in Physical Education and Sports. First aid to various sports injuries UNIT-IV Communicable Diseases, # Meaning of a Communicable disease. Communicable disease such as HIV / AIDS, Tuberculosis, Hepatitis-A,B,C. Their modes of transmission and method of prevention. Postur...

BA ii Syllabus 1st Paper

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  PHYSICAL EDUCATION  B.A.-II YEAR  PAPER FIRST  MAXIMUM MARKS-30 Anatomy & Physiology in Physical Education UNIT-I Anatomy and Physiology of Exercise # Meaning and definition of Anatomy and Physiology. Its need and importance in Physical Education and Sports. शरीर रचना विज्ञान एवं शरीर क्रिया विज्ञान का अर्थ तथा शारीरिक शिक्षा में इनकी आवश्यकता एवं महत्व # Definition of Cell, tissue, organ, and system. Structure and functions of Cell. कोशिका, ऊतक, अंग एवं तंत्र की परिभाषा,  कोशिका की संरचना एवं कार्य UNIT-II Skeletal and Muscular System कंकाल एवं पेशीय तंत्र # Types of Bones and names of various bones of the body. मानव शरीर की अस्थियों के प्रकार एवं उनके नाम # Various types of joints and major movements around them. मानव शरीर की मुख्य संधियां एवं उनकी गतियां  # Structural classification of skeletal muscle, structure and functions of skeletal muscle. पेशियों का वर्गीकरण, कंकाल तंत्र से जुड़ी पेशियों की कार्य UNIT-III Respiratory and Digesti...