एनाटामी व फिजियोलॉजी - शरीर रचना विज्ञान एवं क्रिया विज्ञान

शरीर रचना विज्ञान एवं शरीर क्रिया विज्ञान

Anatomy and Physiology



(एनाटॉमी एवं फिजियोलॉजी)


मानव शरीर एक अद्भुत जटिल मशीन है जो कि निरंतर कई कार्य एवं क्रियाएंं जीवन पर्यंत  बाह्य एवं आंतरिक रूप से अद्भुत समन्वय के साथ संपादित करती रहती है। 

देखना, सुनना, सांस लेना, चलना फिरना, भोजन का पाचन,सोचना आदि प्रकार की अनंत क्रियाएं हैं जो कि हम जाने अनजाने में जीवन पर्यंत करते रहते हैं। समस्त कार्य शरीर के विभिन्न अंग अत्यधिक संतुलन एवं संयोजन के साथ करते हैं।

शरीर की संपूर्ण कार्य प्रणाली को समझने के लिए शरीर की संरचना एवं शरीर की कार्यप्रणाली को समझना आवश्यक हो जाता है

 शरीर रचना-विज्ञान अथवा शारीरिकी (Anatomy)

शरीर रचना विज्ञान जीव विज्ञान और आयुर्विज्ञान की एक शाखा है जिसके अंतर्गत किसी जीवित (चल या अचल) वस्तु के शरीर के वाह्य व आंतरिक अंग प्रत्यंग की रूप, स्थिति, आकार व रचना का अध्ययन किया जाता है।

शरीर क्रिया विज्ञान अथवा कार्यिकी (Physiology)

शरीर क्रिया विज्ञान आयुर्विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत मानव शरीर के विभिन्न अंगों एवं तंत्रों के संचालन एवं कार्य प्रणाली का अध्ययन किया जाता है।

एक्सर्साइज फिजियोलॉजी एवं स्पोर्ट्स फिजियोलॉजी (Exercise & Sports Physiology)

Exercise & Sports Physiology में व्यायाम तथा खेलकूद की क्रियाओं के दौरान शारीरिक ढांचे एवं शरीर की आंतरिक क्रियाओ में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन किया जाता है 

शारीरिक शिक्षा एवं खेलों में शरीर रचना विज्ञान एवं शरीर क्रिया विज्ञान के अध्ययन की आवश्यकता एवं महत्व

  • समस्त व्यायाम एवं खेलकूद प्रक्रियाओं में शरीर सक्रिय रूप से भाग लेता है। अतः इन समस्त क्रियाओं को ठीक प्रकार से करने के लिए तथा खेलों में उच्च प्रदर्शन करने के लिए मानव शरीर के विभिन्न अंगों एवं शरीर की आंतरिक क्रियाओं को समझना अति आवश्यक होता है जोकि शरीर रचना व क्रिया विज्ञान के अध्ययन से ही संभव है।
  • ऐनाटॉमी के अध्ययन से शरीर के विभिन्न अंगों के स्थिति आकार एवं  संरचना को समझ सकते हैं जिससे हमें खेलकूद के दौरान विभिन्न शारीरिक अंगों की की स्थिति एवं क्रियाओं को समझते हैं 
  •  हम विभिन्न आयु की अवस्था में शरीर में हो रहे क्रमिक वृद्धि एवं विकास को समझ सकते हैं जिससे विभिन्न आयु वर्गो हेतु अलग अलग प्रकार की व्यायाम एवं खेलकूद के चयन करने में सहायता मिलती है।
  • एनाटॉमी एवं फिजियोलॉजी की ज्ञान के आधार पर हम खिलाड़ियों हेतु उचित प्रशिक्षण एवं आहार का निर्धारण कर सकते हैं 
  • खेलकूद क्रियाओं के दौरान लगने वाली चोटों एवं थकान से उबरने में भी एनाटॉमी एवं फिजियोलॉजी का अध्ययन अति आवश्यक होता है






 








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