कंकाल तंत्र, जोड़ व उनकी गतियां

 कंकाल तंत्र Skeletal System

कंकाल तंत्र मानव शरीर को आकार व सहारा देने तथा आंतरिक अंगों को सुरक्षा प्रदान करने हेतु अनेक अस्थियों के संयोजन से निर्मित आंतरिक संरचना है। इसके अतिरिक्त यह अस्थियों व पेशियों के संयोजन के लिए आधार प्रदान करने के साथ यह शारीरिक अंगों को गति प्रदान करने में सहायक होता है।


अस्थियों से निर्मित ढांचे को कंकाल अथवा अस्थिपिंजर भी कहा जाता है। एक सामान्य वयस्क मानव अस्थिपिंजर में 206 अस्थियां होती हैं। शिशु के जन्म के समय शरीर में अस्थियों की संख्या लगभग 306 होती है जिनकी संख्या आयु बढ़ने पर परिपक्वता की अवस्था आने पर म 206 रह जाती हैं।






मानव कंकाल तंत्र के मुख्य कार्य

  1. यह शरीर को सहारा देने वाला ढांचा होता है
  2. शरीर के आंतरिक‌ कोमल अंगों को सुरक्षा प्रदान करता है
  3. शारीरिक अंगों व शरीर की गति हेतु आवश्यक 
  4. अस्थि मज्जा में रुधिर कणिकाओं का निर्माण, 
  5. अस्थियां कैल्शियम जैसे खनिज लवणों का संग्रह व उनका कमी होने पर कैल्शियम मुक्त करती हैं
  6. अस्थियों की क्षतिग्रस्त होने पर का निर्माण व उनकी मरम्मत का कार्य करता है

अस्थियों के प्रकार 

लंबी अस्थियां Long Bones: यह बड़ी अस्थियां होती हैं जिनके बीच में एक चौड़ा भाग (Shaft) तथा दो गोल नौब (Knob) की तरह सिरे होते हैं। सामान्यतः यह अस्थियां मजबूत और कड़ी होती हैं परंतु सिरों पर कार्टिलेज से ढकी होने के कारण मुलायम होती है जो कि अन्य अस्थियों से जुड़ कर शरीर के बड़े जोड़ बनाती हैं न। जांघ, पैर, भुजा और हाथों में शरीर की मुख्य बड़ी अस्थियां होती हैं 


छोटी अस्थियां Short Bones: यह छोटी लगभग घनाकार प्रकार की अस्थियां होती है। यह सामान्य तौर से नरम गद्देदार अस्थियां होती हैं जो बड़ी और कड़ी हड्डियों की पर्त से घिरी/ढकी होती हैं। कलाई और टखने की अस्थियां इसके उदाहरण है।


चपटी अथवा चौड़ी अस्थियां Flat Bones: यह पतली, चौड़ी और सामान्य तौर पर गोल आकृति की अस्थियां होती हैं, मुख्य रूप से यह सिर, स्कैपुला और पसलियों में पाई जाती हैं  

बेतरतीब अस्थियां Irregular Bones: इसमें हुए सभी छोटी बेडौल प्रकार की अस्थियां आती हैं जो उपरोक्त में से किसी प्रकार की नहीं होती। रीढ़ की हड्डी और चेहरे की हड्डियां इसके उदाहरण है

 

तिलाकार अथवा बीजाकार अस्थियां Seasmoid Bones: यह बीज के आकार की टेन्डन से निर्मित छोटी-छोटी अस्थियां होती हैं जो कि हाथ और पैर की उंगलियों के जोड़ों वह घुटने पर पाई जाती हैं

मानव शरीर की अस्थियां

एक सामान्य मनुष्य के शरीर में 206 हड्डियां होती है जिन्हें अध्ययन की दृष्टि से दो भागों में बांटा जाता है 

  1. अक्षीय/स्तंभीय कंकाल (Axial Skeleton) 80
  2. अनुबंधीय कंकाल (Appendicular Skeleton) 126

1- अक्षीय/स्तंभीय कंकाल(axial skeleton): 

शरीर के मुख्य अक्ष बनाने व शरीर को सहारा देने वाले तथा कोमल अंगों को सुरक्षित रखने वाले कंकाल को अक्षीय कंकाल कहते है। , इसमें मनुष्य की खोपड़ी , कशेरुकी खण्ड (रीढ़) व छाती और पसलियों की अस्थियां आती है। अक्षीय कंकाल में कुल 80 अस्थियाँ होती है

खोपड़ी (Skull): इसमें कपाल (Cranium), चेहरा (Face), और कान (Ear) की अस्थियां आती हैं।

कपाल (Cranium) - कुल 8 अस्थियां

  • फ्रंटल - माथा -(01)
  • पेरिटल (02)- माथे से ऊपर कपाल का ऊपरी हिस्सा बनाती हैं 
  • ऑक्सीपिटल-(01) कपाल का पिछला और नीचे का भाग
  • टेंपोरल- कनपटी - (02)
  • स्फेनॉइड-(01) कनपटी से आगे की ओर दृष्टि एवं नाक की तंत्रिकाओं हेतु रास्ता देता है
  • इथोमाइड-(01) नाक की छत बनाने में


चेहरे की अस्थियां - 14

  • नेजल बोन - 2 नाक के पुल के ऊपरी भाग का निर्माण करती है
  • मैक्सिलेरी बोन - 2 ऊपरी जबड़े की अस्थियां
  • मैन्डेबल बोन -1 निचले जबड़े की अस्थि। चेहरे की सबसे बड़ी और मजबूत अस्थि
  • जाइगोमैटिक -2 गालों की अस्थियां
  • लैक्रेमल -2 नाक के छिद्र बनाती है
  • पैलेटाइन-2 तालू की हड्डी
  • इनफीरियर कौंचे-2 की अंदरूनी दीवार का निर्माण करती है
  • वोमर-1 नाक के निचले व पिछले भाग की हड्डी



कान की अस्थियां Ear Bones  (6)


  • मैलिस (हैमर) 2
  • इनियस (एनविल) 2
  • स्टेप्स (स्टरअप) 2  
स्टेप्स अथवा स्टेपीस मानव शरीर की सबसे छोटी अस्थि होती है

कंठिका Hyoid Bone (1)- U आकार की ठुड्डी के नीचे गर्दन में सामने की ओर स्थित

पसलियां (Rib Cage) - 25

  • स्टरनम (1)- छाती के बीचो बीच कटार की आकृति की अस्थि
  • वास्तविक अथवा असल पसलियां (7 जोड़ी) - यह ऊपर की साात पसलियां है जो स्टरनम से कोस्टल कार्टिलेज द्वाराा जुड़ी रहती हैंं
  • बनावटी पसलियां (5 जोड़ी)- यह पसलियां स्टरनम से सीधी नहीं जुड़ी होती हैंं। ऊपरी 3 जोड़ी सातवीं पसलियों से जुड़ते हैं और अंतिम 2 जोड़ी स्टरनम से पूरी तरह अलग होती हैं

रीढ़ की हड्डी Vertebral Column  (26)(कशेरुक दण्ड)

मनुष्य की रीढ़ की हड्डी शरीर के पृष्ठ भाग में स्थित 26 हड्डियों से मिलकर बनी होती है जो कि अंग्रेजी के अंग्रेजी के S अक्षर की तरह लचकदार छड़ की तरह होती हैै । ऊपर की 24 हड्डियों के बीच में रिक्त स्थान होता है और यह सभी एक दूसरे से इंटरलॉक होती हैं। रिक्त स्थानों से बनी नली जैसे आकृति के अंदर मेरुरज्जु (Spinal Cord) सुरक्षित रहता है 






  • सर्वाइकल रीढ़ की हड्डी (C-1 से C-7 तक)- गर्दन में स्थित ऊपर की पहली 7 हड्डियां सर्वाइकल कहलाती है जो की खोपड़ी को रीढ़ से जोड़ती हैं
  • थोरोसिक रीढ़ की हड्डी (T-1 से T-12 तक)- वक्ष के क्षेत्र में स्थित अगली 12 की हड्डियां थोरेसिक रीढ़ कहलाती है
  • लम्बर रीढ़ की हड्डी (L-1 से L-5 तक)- कमर के क्षेत्र में स्थित 5 हड्डियां लम्बर रीढ़ की हड्डी कहलाती है
  • सैक्रम हड्डी (1)- कमर के नीचे त्रिभुजाकार आकार की एक हड्डी सैक्रम कहलाती है। (छोटे बच्चों में इनकी संख्या 5 होती है जो कि प्रौढ़ावस्था में जुड़ कर एक हो जाती है)
  • कौकसिक्स (1)- यह सैक्रम से ही जुड़ी हुई एक छोटी पूंछ की तरह हड्डी (Tail Bone) होती है। (वास्तव में यह आपस में जुड़ी हुई 4 अस्थियों से मिलकर बनती हैं)



अनुबंधीय कंकाल (appendicular skeleton) : अनुबंधीय कंकाल मनुष्य के अंगों की गति के लिए उत्तरदाई होता है, यह स्तंभीय कंकाल से जुड़ा हुआ होता है। इसमें हाथ और पैरों, जांघ, नितंब की अस्थियां आती हैं।मनुष्य के अनुबन्धी कंकाल में 126 अस्थियां होती है |

 अध्ययन के लिए इन्हें ऊपरी अग्रांग (Upper Limbs) निचले अंग्रांग (Lower Limbs) में वर्गीकृत किया जाता है।

मनुष्य के अनुबन्धी कंकाल में 126 अस्थियां होती है |


  • ऊपरी अंग्रांग Upper Limbs/Extremities 
  • निचले अंग्रांग Lower Limbs/Extremities


ऊपरी अंग्रांग Upper Limbs

इसके अंतर्गत कुल 64 अस्थियां आती है जो कि निम्नलिखित हैं

  • क्लेविकल (2) - हंसूली की हड्डियां 
  • स्कैपुला (2)- दो कंधों के चपटे ब्लेड स्कैपुला और क्लेविकल दोनों मिलकर कंधे का जोड़ बनाते हैं 
  • ह्यूमरस (2) -यह दोनों बाजू की कोहनी से ऊपरी भाग की हड्डियां है 
  • रेडियस (2)- यह निचले बाजुओं की अंगूठे की ओर की हड्डियां हैं 
  • अल्ना (2)- यह छोटी उंगली की ओर की बाजू की हड्डियां है जो रेडियस से लंबी होती हैं
  • कार्पल्स (16)- यह कलाई की हड्डियां है। प्रत्येक कलाई में 4 - 4 कार्पल्स की 2 पंक्तियों में सुसज्जित रहती हैं 
  • मैटाकार्पल्स (10)- यह हथेलियों की हड्डियां होती है, प्रत्येक हाथ में 5-5
  • फैलेंजिस (28)- यह उंगलियों की हड्डियां है प्रत्येक हाथ की उंगलियों में तीन-तीन तथा अंगूठे में दो-दो होती है

निचले अग्रांग Lower Limbs/Extremities

इसमें कुल 62 हड्डियां होती हैं जो कि निम्नलिखित हैं

  • पेल्विक बोन (2) यह कूल्हे की लंबी हड्डियां होती हैं
  • फीमर (2) यह जांघों की हड्डियां है जो शरीर की सबसे लंबी और मजबूत हड्डी होती है 
  • पटेला (2) यह घुटने की चपनियां हैं
  • टीबिया (2) यह शिन की हड्डी है 
  • फिबुला (2) ये पतली लंबी हड्डियां है जो निचली टांगों में की भीतर की ओर होती हैं 
  • टारसल्स (एड़ी) (14) जोड़ी की हड्डियां है। ये एड़ी तथा पांव की ऊपरी भाग में होती है
  • मेटाटारसल (भीतरी हड्डियां) (10) पांवों की लंबी हड्डियां है 
  • फैलेंजिस (पंजों की हड्डियां) (28) ये पंजों की हड्डियां होती है जो हर अंगूठे में 2-2 और पैर की पैर की उंगलियों में 3-3 होती हैं

जोड़ों के प्रकार और उनकी गतियां 

शरीर के अंगों की गतियां 3 एनाटॉमिकल धरातल (Anatomical Plane) में होती हैं में, जो कि निम्न हैं

  1. फ्रंटल प्लेन Frontal Plane - यह प्लेन शरीर को काल्पनिक रूप से शरीर को बीच में से सामने की और पीछे की ओर भागों में बांटता है।
  2. सैजिटल प्लेन Segittal Plane - यह प्लेन शरीर को काल्पनिक रूप से शरीर को बीच में से दाहिने ओर बायें भागों में बांटता है।
  3. हॉरिजॉन्टल प्लेन Horizontal Plane- यह समानांतर प्लेन शरीर को काल्पनिक रूप से शरीर को बीच में से ऊपरी और निचले भागों में बांटता है।




संधियों के प्रकार 

संधियों को उनकी गति के आधार पर तीन भागों में बांटा गया है 

  1. अचल संधि  Immovable Joints
  2. अर्द्ध चल संधि Semi Immovable Joints
  3. चल संधि



1-अंचल संधि (Immovable Joints) (स्थिर जोड़) [Fixed, Fibrous, Synarthrosis]

अंचल संधि में दो या दो से अधिक अस्थियां आपस में स्थिर रूप से जुड़ी रहती हैं व उनमें कोई भी गति नहीं होती।

उदाहरण: खोपड़ी के जोड़ (Suture), दातों के जोड़ (Gumphosis or Peg & Socket)

2-अर्द्ध चल संधि Slightly Movable Joint

[Cartilaginous, Amphiarthrosis]

वे जोड़ जिनमें बहुत ही कम अथवा सीमित गति होती है

उदाहरण: रीढ़ की हड्डी के जोड़, कूल्हे का जोड़

3- चल संधि Freely Movable Joints, Synovial, Diarthrosis

चल संधि में वे सभी जोड़ आते हैं जो एक या एक से अधिक तलों (Planes) पर गतियां करते हैं। चल संधि के कारण ही शरीर के विभिन्न अंग गतियां करते हैं

चल संधियों को बनावट स्थिति एवं गतिशीलता के आधार पर इन्हें छह भागों में बांटा गया है

i. फिसलने वाले जोड़ (ग्लाइडिंग ज्वाइंट, Gliding Joints)

इसमें संधि करने वाली अस्थियां एक दूसरे के ऊपर थोड़ा सा फिसलती है जैसे कार्पल और टार्सल के जोड़

ii. पीवट जोड़ Pivot Joint - एक हड्डी का सिरा दूसरी स्थिर हड्डी की सिरे पर घूमता (घूर्णन) है। जैसी सर्वाइकल (C1, C2) के ऊपर खोपड़ी घूमती है

iii. कब्जा संधि Hinge Joint- कब्जा संधि में जुड़ने वाली अस्थियों के बीच किसी दरवाजे के कब्जे की तरह ही केवल एक ही तल (Plane) में गति संभव होती है जैसे घुटने और उंगलियों के जोड़

iv. बाल व साकेट जोड़ Ball & Socket Joint- इस जोड़ में एक हड्डी का गेंद के आकार (Ball) का एक सिरा दूसरी अस्थि के गड्ढे नुमा आकृति (Socket) में फिट बैठ कर जोड़ की सभी तलों पर गतियां संभव करता है। जैसे कंधे और कूल्हे का जोड़ 

v. काठी जोड़ Saddle Joint- यह दो अस्थियों के उत्तल और अवतल सिरों के बीच बनने वाला जोड़ है, जिस प्रकार एक घुड़सवार घोड़े के ऊपर बैठा हो। जैसी अंगूठे कार्पल्स का जोड़

vi. कंडोलोइड जोड़ Condyloid Joint- इस प्रकार की जोड़ में दो तलों में गतिया संभव होती है जैसे कलाई की गति जो सामने और पीछे की ओर तथा दाईं और बाईं तरफ होती है


जोड़ों की गतियों के नाम

  1. फ्लैक्शन - मोड़ना - Flexion - इसमें दो अस्थियां एक दूसरे के निकट आती हैं वह उनकी बीच का कोण कम होता है, जैसे कोहनी और उंगलियों का मोड़ना
  2. एक्सटेंशन - विस्तारण - Extension - इसमें मुड़ी हुई अस्थियां एक दूसरे से दूर जाती है और उनकी बीच का कोण बढ़ता जाता है जैसे मुड़ी कोहनी व उंगलियों को सीधा करना 
  3. बाहर की ओर उठाना - एबडक्शन - Abduction - अंग की शरीर की मध्य रेखा से बाहर की ओर गति
  4. एडक्शन - Adduction - भीतर की ओर (शरीर की मध्य रेखा की ओर) गति
  5. रोटेशन - चक्रावर्तन - Rotation - इसमें एक अंग अपनी धुरी पर घूमता है जैसे सिर व धड़ का एक ओर से दूसरी ओर घूमना
  6. सर्कमडेक्शन - पर्यावर्तन - Circumduction - यह कोणीय और घूर्णन गतियों का मिश्रण है जिसमें कोई अंग केंद्र के चारों ओर गति करता है, जैसे कलाई को घुमाना
  7. सुपीनेशन - उत्तानन - Supination - शरीर की पृष्ठ भाग को नीचे की तरफ रखना, जैसे पीठ के बल लेटना हथेली को ऊपर की तरफ करना
  8. प्रोनेशन - अवतानन - Pronation शरीर को अथवा किसी अंग के कोमल भाग को नीचे की तरफ रखना जैसे पीठ के बल लेटना हथेली को नीचे की तरफ रखना
  9. इनवर्सन Inversion - अंग को मध्य रेखा की तरफ लाना जैसे पैर के पंजों को अंदर की तरफ होना
  10. इवर्सन Eversion - शरीर के अंग को मध्य रेखा की से बाहर ले जाना जैसे पैर के पंजों को बाहर की तरफ मोड़ना







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